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झलक

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                   तिरी झलक में हर दिन मेरी पूर्णमासी होती है इसलिए अब चांद की जरूरत मुझे नहीं होती है सितारों की भी अब नहीं होती परवाह तिरे ख्वाबों की छाव में रोशन मेरी हर रात होती है सामने आकर बताता कैसे दिल का ये राज़ तेज होती धड़कनों की एक तू ही वजह होती है नजर नहीं हटती अक्षरशः पढ़ जाने के बाद भी किताब के हर पन्ने में तू मुस्कुरा रही होती है तेरी बेपरवाही को अपनी तकदीर मान लिया मैंने बहुत हुआ, इंतजार की भी कोई इंतेहा होती है तिरी इबादत से ही पाक होती है मिरी आत्मा ' ओमी ' मोहब्बत की डगर इससे बेहतर और क्या होती है