उसूल
दास्तां ए मोहब्बत को इस तरह जारी रखा तूने, न अपना बनाया मुझे, न खफा होने दिया तूने। हर वक्त मेरे अरमानों को खोखला करता रहा, न खुद जीता, न मुझे हारने दिया तूने। हर नाज सिद्दत से उठाया वफ़ा निभाने के लिए, मैं बरबादी पर भी हंसा, एक आंसू न बहाया तूने। मजबूरियों का वास्ता दे मुंह फेर लिया था ' ओमी ' मैं संवरता कैसे! माफ़ी में किस्सा दोहरा दिया तूने।।