Posts

Showing posts from 2015

मां तेरे आंचल में

Image
     कितना सुकुन था मां तेरे आंचल में  बस लिपटकर हर दुःख भुल जाया करते थे तेरी ही डांट-मार से डर-डपटकर  तुझसे ही लिपट जाया करते थे तेरे साये में रहकर एक खरोंच भी अपनी नहीं रही जैसे हर दर्द हमारा बस तू जी लेती थी तेरे गुस्से को समझने की तरकीब आयी मेरी दुनियां की खातिर तू अपना हर ग़म भूल अाई अंधेरे से वाकिफ कराया तूने, पहचान बताई उजाले की सिमटा कर अपने सपनें तूने, नई दुनियां मुझे दिखाई  सब कुछ बदला हमने खुद में ममता तेरी वही रही कितना खुद में उलझ गये हम पर दर्द का मरहम तुझसे ही तेरे दर्द सभी अनजाने हमसे, ख्वाब बिल्कुल मेरे जैसे ममता सबसे निराली तेरी, शब्द ये मां बस इतना सा ही।।                               उमेश नैलवाल

बचपन की दोस्ती

Image
             वो सारी यादें सिलसिलेवार बदलने लगी एक कहानी में, जब बचपन याद करने बैठा एक दिन तेरी तस्वीर लेकर याद है तेरे साथ बैंच शेयर कर लेक्चर के वक्त क्लास में गप्प मारना फिर दोनों की मम्मीयों का अचानक एक दिन स्कूल में आकर हमारी शैतानियों की शिकायत करके अलग बिठाने की गुजारिश करना कुछ दिन बिछड कर मम्मीयों को कोसना और फिर इक्कठे बैठ जाना स्कूल लाइफ तक बैस्ट फ्रेंड होने का नाटक करके दोस्त बने रहना कभी झगडने और गाली गंदी होने पर महीनों तक बात न करना कई दिनों तक फिर बाते करने और गले लगने को तड़फना और फिर से दोस्त बनने का बहाना ढूंढकर एक-दूसरे पर गलती थोपना दोस्ती खत्म सी होती लगती आज, बचपन बीतने के बाद से नए दोस्त बनते कालेज की पढाई और नई मैच्यौरिटी का आना पर जब यादें बचपन की ताजा होती हैं समय के साथ-साथ तो बचपन की पहली दोस्ती आज फीकी और गयी गुजरी लगती है क्यूं आज वो अभिमान सा नजर आता तेरा-मेरा बात करना क्यूं आज इतने बडे हो गए हम कि सब याद हो कर वो दोस्ती याद न आना चलो माना इन्सानियत खत्म सी हो गई इस जहां में लेकिन दोस्ती के किस्से तो ...

झलक

Image
                   तिरी झलक में हर दिन मेरी पूर्णमासी होती है इसलिए अब चांद की जरूरत मुझे नहीं होती है सितारों की भी अब नहीं होती परवाह तिरे ख्वाबों की छाव में रोशन मेरी हर रात होती है सामने आकर बताता कैसे दिल का ये राज़ तेज होती धड़कनों की एक तू ही वजह होती है नजर नहीं हटती अक्षरशः पढ़ जाने के बाद भी किताब के हर पन्ने में तू मुस्कुरा रही होती है तेरी बेपरवाही को अपनी तकदीर मान लिया मैंने बहुत हुआ, इंतजार की भी कोई इंतेहा होती है तिरी इबादत से ही पाक होती है मिरी आत्मा ' ओमी ' मोहब्बत की डगर इससे बेहतर और क्या होती है
29 May   आज फिर समाचारों में एक और दर्दनाक और इन्सानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई रोज की कई सारी घटनानाओं की तरह। दिल फिर रो बैठा आखिर क्या हो गया है समाज को ?     एक महिला जिसका ढाई माह पूर्व ही प्रेम विवाह हुआ था उसे उसके पति व ससुरालियों ने बेरहमी से मार पिट कर जला दिया। सुनते ही दिल दहला देने वाली इस घटना को अंजाम देने वालों पर क्या कोई डर सितम नहीं छाया होगा। कैसे इन्सान और कैसी इन्सानियत रह गयी है हमारे समाज में ?     आखिर हमें क्या हक है किसी की जिन्दगी तबाह करने का जो उस ऊपर वाले की दी है। कहते हैं हर जिन्दगी की डोर उस ऊपर वाले के हाथ में है तो आखिर ये इन्सान कौन होता है किसी की जिन्दगी से खेलने वाला, किसी की जिन्दगी बरबाद करने वाला और किसी की जिन्दगी खत्म करने वाला।      क्यों एक इन्सान दुसरी जिन्दगी पर अपना मालिकाना हक समझकर कुछ भी करने की हिमायत रखता है। क्यों कोई महिला शादी के बाद अपने पति या ससुरालियों की गुलाम हो जाती है क्या उसे अपने ढंग से जीने का कोई हक नहीं है? क्यों उसे कठपुतली समझकर प्रताडित किया जाता है क्या यही...
Image
The Beautiful place nd Heaven Gairsain...
Image
The PAAMIR of Uttrakhand... Dudhatouli Range...

समय

Image
                          कुछ है जो परिवर्तन ले आता है प्रकृति में ही नहीं इन्सान में भी कुछ है जो कभी गुजर जाता है हवा के झोंके की तरह खुशी के पल में और कभी थम जाता है दुःख की घडी में सुखी नदी की तरह पर कुछ है जो गुजर ही जाता है किसी भी हालात में कुछ समय कहते हैं उसे और कुछ क्रुर वेदना कह देते हैं।। कुछ है जो तरसा देता है बीता खुशनुमा पल वापस लाने के लिये कुछ है जो स्तब्ध कर देता है दुःख के पलों को जिन्दगी में ठहराकर और फिर चला जाता है निरंतरता से सब कुछ समेटते हुए अपने आगोस में पर कुछ है जो हर भले को बुरा और हर बुरे को बदल देता है कुछ समय कहते हैं उसे और कुछ के लिये काल बन जाता है।। कुछ है जो बदलता रहता है अपने कालक्रम प्रत्येक जिन्दगी में कुछ है जो हर आत्मा को विलग बनाता है उसके अहम में और जो खुद समाप्त ना होकर किसी का सब समाप्त कर देता है पर कुछ है जो दिशा बदल देता है राह की हर मोड के बाद कुछ समय कहते हैं उसे और किसी के लिए झूठ बन जाता है।।                 ...

इंतजार

Image
कितना अजीब है         इस दुनिया में आना और फिर यूं ही चले जाना         कुछ दुःख झेलना और फिर खुंशियों का इन्तजार करना। कितना अजीब है,         जिन्दगी का खेल तैयार करना और फिर उसमें किस्मत आजमाना,  उस खेल में चोटिल होना और फिर जीत की आस लगाना। कितना अजीब है, इस जिन्दगी को जीना और उसमें खुद को हारते देखना हर सख्श से खुद को नापना-तोलना और बेहतर होने की कोशिश करना। कितना अजीब है, किसी से रिश्ता बनाना और उसके दुःख में उतरना किसी से प्रेम करना और फिर उसके लिये तडफना कितना अजीब है ना ये सब।।                                    उमेश नैलवाल
Image
    सोचा समय के साथ साथ हम इस सदमें से उबरेंगे और और उनकी याद धुंधलाते जायेगी लेकिन हमें उस ऊपर वाले ने इतना बडा झटका और दर्द दिया है कि इस दर्द से उबरना अब मुश्किल लगता है और उनकी याद कभी नहीं धुंधलायेगी क्योंकि वो हर चीज में नजर आयेंगे वो हर बार हर बात में नजर आयेंगें और उस ऊपर वाले नाइंसाफी हमें हर बार रूलायेगी। आज इतने दिन बाद भी लगता है जैसे हम सपना देख रहे हों, एक बुरा सपना जो जल्द टुटेगा और हमें राहत देगा और उस इन्सान को हमें लौटा देगा जो उस क्रूर काल ने हमसे छीन लिया है । क्योंकि अब तक हमें उस ऊपर वाले के इन्साफ पर भरोसा था हमें पता है वो नाइन्साफी नहीं करता वो हमसे एक ऐसा इन्सान नहीं छीन सकता जो हम सब के लिये बहुत मायने रखता हो, जो इस समाज के लिये मायने रखता हो, जो दुसरों के लिये प्रेरणा हो। यकीन है कि भगवान ऐसे इन्सान को हमसे दूर नहीं कर सकता। क्योंकि एक ऐसे इन्सान का हमसे दूर चला जाना बडा दुःखद है जिसने खुद के सिवा सबके लिए सोचा हमेशा इस समाज केे लिये सोचा। जिनके पास अपने हर आने वाले पल का जवाब होता मतलब उनके पास अपने हर काम के लिए समय निर्धारित होता था की इस वक्...