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Showing posts from September, 2018

राजनीति आजकल

दौर हो चुनावी तो अपनी जुबां को आदाब कर दोगे। सत्तासीन हो जब ही अपनी तहज़ीब नीलाम कर दोगे।। बयार में फैली हर ख़ुशबू में नफ़रत घोल दोगे। कोई पूछूं जो सवालात तो मेरी कब्र खोल द...

इनायत

इनायत थी, तुम दाखिल हुए मेरी ज़िन्दगी में। गर्दिश, कि तुम हाथों की लकीर ना बन सके।। जितना बन पड़ा, कुर्बां किया तुम्हारी बंदगी में। मोहब्बत की दास्तां में, हम और अमीर ना बन स...

परिस्थिति

जब जब खिलाफ़ थी परिस्थितियां, उम्मीदों ने सहारा दिया है। ज़िन्दगी बिखरने को तैयार थी, ख्वाहिशों ने बसेरा दिया है। माथे पर शिकन की लकीरें बनी, वक्त ने मोहलत का दिलासा दिया है...

किरदार

एक कहानी मैनें लिखी, एक कहानी तुम कह रही हो। मैने तुम्हें लिखा, तुम कुछ और जी रही हो। तुम्हारे वजूद पर, आगे बढ़ी मेरी कहानी की पराकाष्ठा। मेरे किरदार को झुठलाकर, खुद की बेवफा...