इंतजार
कितना अजीब है
इस दुनिया में आना और फिर यूं ही चले जाना
कुछ दुःख झेलना और फिर खुंशियों का इन्तजार करना।
कितना अजीब है,
जिन्दगी का खेल तैयार करना और फिर उसमें किस्मत आजमाना,
उस खेल में चोटिल होना और फिर जीत की आस लगाना।
कितना अजीब है,
इस जिन्दगी को जीना और उसमें खुद को हारते देखना
हर सख्श से खुद को नापना-तोलना और बेहतर होने की कोशिश करना।
कितना अजीब है,
किसी से रिश्ता बनाना और उसके दुःख में उतरना
किसी से प्रेम करना और फिर उसके लिये तडफना
कितना अजीब है ना ये सब।।
उमेश नैलवाल
इस दुनिया में आना और फिर यूं ही चले जाना
कुछ दुःख झेलना और फिर खुंशियों का इन्तजार करना।
कितना अजीब है,
जिन्दगी का खेल तैयार करना और फिर उसमें किस्मत आजमाना,
उस खेल में चोटिल होना और फिर जीत की आस लगाना।
कितना अजीब है,
इस जिन्दगी को जीना और उसमें खुद को हारते देखना
हर सख्श से खुद को नापना-तोलना और बेहतर होने की कोशिश करना।
कितना अजीब है,
किसी से रिश्ता बनाना और उसके दुःख में उतरना
किसी से प्रेम करना और फिर उसके लिये तडफना
कितना अजीब है ना ये सब।।
उमेश नैलवाल

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