मां तेरे आंचल में

    
कितना सुकुन था मां तेरे आंचल में 
बस लिपटकर हर दुःख भुल जाया करते थे
तेरी ही डांट-मार से डर-डपटकर 
तुझसे ही लिपट जाया करते थे
तेरे साये में रहकर एक खरोंच भी अपनी नहीं रही
जैसे हर दर्द हमारा बस तू जी लेती थी
तेरे गुस्से को समझने की तरकीब आयी
मेरी दुनियां की खातिर तू अपना हर ग़म भूल अाई
अंधेरे से वाकिफ कराया तूने, पहचान बताई उजाले की
सिमटा कर अपने सपनें तूने, नई दुनियां मुझे दिखाई 
सब कुछ बदला हमने खुद में ममता तेरी वही रही
कितना खुद में उलझ गये हम पर दर्द का मरहम तुझसे ही
तेरे दर्द सभी अनजाने हमसे, ख्वाब बिल्कुल मेरे जैसे
ममता सबसे निराली तेरी, शब्द ये मां बस इतना सा ही।।
                              उमेश नैलवाल

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