बुनियाद
उलझे से इस रिश्ते की
बुनियाद गिरने का डर है मुझे,
वरना अपने भरोसे मे लेकर तुझे सारा
हाल बताने का मन करता
है।
फ़िक्र है तेरे सपनों का अंगना ना
बिखरे मेरी खातिर,
वरना अपनी नींदों में तेरे खयालों को जीने का
मन करता है।
तेरे
मासूम से चेहरे पर उदासी का डर लगता
है मुझे,
वरना
तेरी पलकों पर बैठकर बह जाने का मन करता
है।
तेरे
दिल का वहम भी
है बेफिजूल मेरी आदत से,
वरना
तेरी धडकनों की रफ्तार बन
जाने का मन करता
है।
तेरी
कदर की फितरत बेपरवाह
हो रही है हर पल
मुझसे,
वरना
दुःखों के अन्धेरे में
तेरा साया बन जाने का
मन करता है।
मेरी वसीयत मुझे मामूली नजर आती है तेरी बंदगी में,
वरना
तेरी जिन्दगी और किस्मत दोनों
लिखने का मन करता
है।
हर
एहसास तेरे ख्यालों
की बैचैनी में गुजरता है मेरा,
पर आखिरी सांस
तक तेरी बेकरारी में तडपने का मन करता
है।
उमेश
नैलवाल

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