वक्त तन्हा ना कर देना....
तुम्हारे जहन में कैंद हो मेरा जमाना,
तो मेरी खामोशियों संग उसे आबाद कर देना।
कोई अफसोस गर जताये तुम्हारे अल्फ़ाज़,
तो मेरे हिस्से में अन्धकार कर देना।
कभी काटने को दौड़े कोई सवाल,
तो खयालातों की फेहरिस्त लम्बी कर देना।
एहतियात बरतना कि वफा की गुंजाइश ना बचे,
मेरा किरदार अपने जहां से सदियों दूर कर देना।
कभी सुराग हो इस फासले की दीवार में,
तो आंखें बंद कर सारे दर्द चिनवा देना।
सब-कुछ नये तरीके से पिरोना,
मेरा अफसाना ज़लाकर खा़क कर देना।
जिन्दगी है...ओमी! फकत दौर थमें ना कहीं,
मेरी शख्सियत में वक्त तन्हा ना कर देना...।
उमेश नैलवाल
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