29 May
आज फिर समाचारों में एक और दर्दनाक और इन्सानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई रोज की कई सारी घटनानाओं की तरह। दिल फिर रो बैठा आखिर क्या हो गया है समाज को ?
एक महिला जिसका ढाई माह पूर्व ही प्रेम विवाह हुआ था उसे उसके पति व ससुरालियों ने बेरहमी से मार पिट कर जला दिया। सुनते ही दिल दहला देने वाली इस घटना को अंजाम देने वालों पर क्या कोई डर सितम नहीं छाया होगा। कैसे इन्सान और कैसी इन्सानियत रह गयी है हमारे समाज में ?
आखिर हमें क्या हक है किसी की जिन्दगी तबाह करने का जो उस ऊपर वाले की दी है। कहते हैं हर जिन्दगी की डोर उस ऊपर वाले के हाथ में है तो आखिर ये इन्सान कौन होता है किसी की जिन्दगी से खेलने वाला, किसी की जिन्दगी बरबाद करने वाला और किसी की जिन्दगी खत्म करने वाला।
क्यों एक इन्सान दुसरी जिन्दगी पर अपना मालिकाना हक समझकर कुछ भी करने की हिमायत रखता है। क्यों कोई महिला शादी के बाद अपने पति या ससुरालियों की गुलाम हो जाती है क्या उसे अपने ढंग से जीने का कोई हक नहीं है? क्यों उसे कठपुतली समझकर प्रताडित किया जाता है क्या यही हमारी इन्सानियत है?
रोज ऐसी दिल दहलाने वाली कई घटनाऐं सामने आती है ये कैसा समाज और कैसी इन्सानियत है?
हे प्रभु! सत्बुद्धि दे।
आज फिर समाचारों में एक और दर्दनाक और इन्सानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई रोज की कई सारी घटनानाओं की तरह। दिल फिर रो बैठा आखिर क्या हो गया है समाज को ?
एक महिला जिसका ढाई माह पूर्व ही प्रेम विवाह हुआ था उसे उसके पति व ससुरालियों ने बेरहमी से मार पिट कर जला दिया। सुनते ही दिल दहला देने वाली इस घटना को अंजाम देने वालों पर क्या कोई डर सितम नहीं छाया होगा। कैसे इन्सान और कैसी इन्सानियत रह गयी है हमारे समाज में ?
आखिर हमें क्या हक है किसी की जिन्दगी तबाह करने का जो उस ऊपर वाले की दी है। कहते हैं हर जिन्दगी की डोर उस ऊपर वाले के हाथ में है तो आखिर ये इन्सान कौन होता है किसी की जिन्दगी से खेलने वाला, किसी की जिन्दगी बरबाद करने वाला और किसी की जिन्दगी खत्म करने वाला।
क्यों एक इन्सान दुसरी जिन्दगी पर अपना मालिकाना हक समझकर कुछ भी करने की हिमायत रखता है। क्यों कोई महिला शादी के बाद अपने पति या ससुरालियों की गुलाम हो जाती है क्या उसे अपने ढंग से जीने का कोई हक नहीं है? क्यों उसे कठपुतली समझकर प्रताडित किया जाता है क्या यही हमारी इन्सानियत है?
रोज ऐसी दिल दहलाने वाली कई घटनाऐं सामने आती है ये कैसा समाज और कैसी इन्सानियत है?
हे प्रभु! सत्बुद्धि दे।
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