प्रतिज्ञा : मुंशी प्रेमचंद
मुंशी प्रेमचन्द हिन्दी साहित्य के उन कथाकारों में से हैं, जिनकी रचनायें मानवीय अभिव्यक्ति व संवेदनाओं से लबालब होती हैं। उनकी कथायें इतनी जीवन्त हैं कि वो आपसे सवाल करने लगती हैं, अपने भीतर झांकने को मजबूर कर देती हैं। बड़ी सहजता से प्रेमचन्द हमारे समाज और परिवेश को सामने रख देते हैं। उनकी कथाओं में उपेक्षितों की वेदना, प्रत्येक मन के भीतर उपजती सकारात्मक या नकारात्मक विचारोत्तेजना प्रकट होती है। प्रेमचन्द के विशाल रचना संसार में से एक उपन्यास है ‘प्रतिज्ञा’, जो एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है, जिसने अपनी भावनाओं और इच्छाओं को जनकल्याण के लिये समर्पित कर दिया। इस उपन्यास में त्याग और समर्पण का भाव है तो सामाजिक भेड़चाल और मानुषिक दोगलेपन की भी परतें उकेरी गई हैं। उपन्यास में अमृतराय, दीनानाथ, प्रेमा, पूर्णा और कमलाप्रसाद जैसे मुख्य किरदार हैं तथा लाला बदरीप्रसाद, सुमित्रा, पंडित बसन्त कुमार, देवकी और कहार जैसे सहायक किरदारों से भी भेंट होती है। कहानी दो पात्रों अमृतराय और दाननाथ के संवाद के शुरू होती है, दोनों परममित्र हैं लेकिन कई स्तरों पर दोनों एक-दूसरे के परस्पर विरोधी भी हैं।...

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