किरदार
एक कहानी मैनें लिखी,
एक कहानी तुम कह रही हो।
मैने तुम्हें लिखा,
तुम कुछ और जी रही हो।
तुम्हारे वजूद पर,
आगे बढ़ी मेरी कहानी की पराकाष्ठा।
मेरे किरदार को झुठलाकर,
खुद की बेवफाई जी रही हो।
एक कहानी मैनें लिखी,
एक कहानी तुम कह रही हो।
मेरी जींस्त की दरकती दरारों में
नये मरहम बनकर आयी तुम
पुराने अफसाने में नये अल्फ़ाज़ों संग
ये कहानी लेकर आयी तुम।
तुमने मुझे रंगा अपनी छाव से,
मैं दुबका रहा तुम्हारे हसीं किस्सों में।
तुम्हारे वजूद ने गढ़ा मुझे,
और अब अपना अस्तित्व झूठला रही हो तुम।
एक कहानी मैनें लिखी,
एक कहानी तुम कह रही हो।
जानता हूं अब मेरी नहीं हो,
लेकिन इस दास्तां का मोड़ थीं तुम।
यूं नयी कहानी सी कर,
मुझे अधूरा छोड रही हो तुम।
एक अंजाम तो दो
मेरा ख़्वाब बनकर इस दास्तां को।
मेरे किरदार को तन्हा कर
एक नयी कहानी गड़ने जा रही हो तुम।
एक कहानी मैनें लिखी
एक कहानी तुम कह रही हो।।
उमेश नैलवाल
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