राजनीति आजकल

दौर हो चुनावी तो अपनी जुबां को आदाब कर दोगे।
सत्तासीन हो जब ही अपनी तहज़ीब नीलाम कर दोगे।।

बयार में फैली हर ख़ुशबू में नफ़रत घोल दोगे।
कोई पूछूं जो सवालात तो मेरी कब्र खोल दोगे।।

जी हुजूरी से देशभक्ति की परिभाषा तोल दोगे।
बोलूं जो हूं परेशां तो देशद्रोह मेरा इल्ज़ाम बोल दोगे।।

ख्याति को अपनी चाटुकारों की लंबी कतार टटोल दोगे।
जो ना बिके सत्ता के आगे तो कत्लेआम बोल दोगे।।

धर्म की दुहाई में जहर का कारोबार खोल दोगे।
एक पड़ोसी था मेरा इंसां उसे भी मुसलमां बोल दोगे।।
                    उमेश नैलवाल

*आदाब- विनम्र

Comments

  1. Kya likhte ho yr tum bhut khub, tumhre sab poems Dil Ko chu jate h ati Sundar👌👌👌👌👌. Humesha aise he poems likha karo or hum enjoy se pdhte rhynge😀😀😀😀

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